श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टीबडेवाला वेदविद्यालय झुन्झुनू राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर (राज.) से सम्बद्धता प्राप्त है। अतः राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा अनुमोदित शुक्लयजुर्वेद संहिता का पंचवर्षीय पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पद्धति इस प्रकार है-
१. शुक्ल यजुर्वेद संहिता के १ से ५ अध्याय का अध्ययन ।
२. याज्ञवल्क्य शिक्षा ।
१. प्रथमवर्ष के पाठ्यक्रम का पारायण ।
२. शुक्लयजुर्वेद संहिता के ६ से १२ अध्याय का अध्ययन ।
३. याज्ञवल्क्य शिक्षा ।
१. प्रथम व द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम का पारायण ।
२. शुक्ल यजुर्वेद संहिता के १३ से २० अध्याय का अध्ययन ।
३. पारस्कर गृह्यसूत्र-प्रथमकाण्ड १-२ कण्डिका का अध्ययन । (अग्नि स्थापन एवं नवाहुति प्रकरण।)
४. पंचाङ्ग ज्ञान व पूजन विधि। (भू-भूत-आसनशुद्धि, भैरव नमस्कार, वरुण पूजन इत्यादि) निर्धारित पुस्तक - वृहदब्रह्मकर्म समुच्चय।
१. प्रथम व तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम का पारायण ।
२. शुक्ल यजुर्वेद संहिता के २१ से ३० अध्याय का अध्ययन ।
३. पारस्कर गृह्यसूत्र-प्रथमकाण्ड ३-८ कण्डिका का अध्ययन, विवाह संस्कार मन्त्र
४. ग्रहशान्ति (ब्रह्मनित्यकर्मसमुच्चय के अनुसार भद्रसूक्त से अभिषेक पर्यन्त)
१. प्रथम व चतुर्थ वर्ष के पाठ्यक्रम का पारायण ।
२. शुक्ल यजुर्वेद संहिता के ३१ से ४० अध्याय का अध्ययन ।
३. पारस्कर गृह्यसूत्र-प्रथमकाण्ड ३-७ कण्डिका का अध्ययन । (उपनयन संस्कार मन्त्र)
४. कुण्ड, मण्डप, मण्डल निर्माण ज्ञान । (मुख्यतः वास्तु, योगिनी, क्षेत्रपाल, सर्वतोभद्र)
१. संस्कृत सम्भाषण
२. लघुसिद्धान्त कौमुदी
३. रचनानुवाद कौमुदी- डा. कपिलदेव द्विवेदी आदि पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन ।
४. विभिन्न स्तोत्रों का पठन और कण्ठस्थीकरण ।
५. श्रीमद्भगवद्गीता का पठन पाठन ।